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श्री संत गोरा कुम्हार

श्री संत गोरा कुम्हार (इ.स. १२६७ ते १३१७) तेरेडोकी गांवमें गोरा कुम्हार नामक एक विठ्ठलभक्त था । कुम्हारका काम करते समय भी वह निरंतर पांडुरंगके भजनमें तल्लीन रहता था । पांडुरंगके नामजपमें वह सदा मग्न होता था । एक बार उसकी पत्नी अपने इकलौते छोटे बच्चेको आंगनमें रखकर पानी भरने गई श्री संत । उस समय […]

श्री श्रीयादे माता की कथा

भक्त शिरोमणि श्री श्रीयादे माता का जन्म सतयुग के प्रथम चरण पाटण में लायइजी जलान्धरा की पुत्री के रूप में माध सुदी 2 (दूज) को हुआ ,वे बचपन से ही घर्म भीरू थी। उनके गुरू उड़न ऋषि थे। श्री श्रीया दे का विवाह गढ़ मुलतान के सावंतजी के साथ हुआ। आपके दो पुत्र एवं एक पुत्री […]

कुबा कुम्‍हार

अभय सरन हरि के चरन की जिन लई सम्हाल ।  तिनतें हारथी सहज ही अति कराल हू काल ॥   राजपूताने के किसी गाँव में कूबा नामके कुम्हार जाति के एक भगवद्भक्त रहते थे । ये अपनी पत्नी पुरी के साथ महीने भरमें मिट्टी के तीस बर्तन बना लेते और उन्ही को बेचकर पति – पत्नी जीवन – निर्वाह करते थे । […]